Skip to main content

महाजनपद, Maha Janapad

महाजनपद, Maha Janapad


महाजनपद

प्राचीन भारत मे राज्य या प्रशासनिक इकाईयों को ‘महाजनपद’ कहते थे। उत्तर वैदिक काल में कुछ जनपदों का उल्लेख मिलता है। बौद्ध ग्रंथों में इनका कई बार उल्लेख हुआ है।यद्यपि कुल सोलह महाजनपदों का नाम मिलता है पर ये नामाकरण अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न-भिन्न हैं। इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि ये अन्तर भिन्न-भिन्न समय पर राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के कारण हुआ है। इसके अतिरिक्त इन सूचियों के निर्माताओं की जानकारी भी उनके भौगोलिक स्थिति से अलग हो सकती है। बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय, महावस्तु मे १६ महाजनपदों का उल्लेख है-
अवन्ति – आधुनिक मालवा का प्रदेश जिसकी राजधानी उज्जयिनी और महिष्मति थी।
अश्मक या अस्सक – दक्षिण भारत का एकमात्र महाजनपद। नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच अवस्थित इस प्रदेश की राजधानी पाटन थी।
अंग – वर्तमान के बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिले। इनकी राजधानी चंपा थी।
कम्बोज – पाकिस्तान का हजारा जिला।
काशी – इसकी राजधानी वाराणसी थी। वर्तमान की वाराणसी व आसपास का क्षेत्र इसमें सम्मिलित रहा था।
कुरु – आधुनिक हरियाणा तथा दिल्ली का यमुना नदी के पश्चिम वाला अंश शामिल था। इसकी राजधानी आधुनिक दिल्ली (इन्द्रप्रस्थ) थी।
कोशल – उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिला, गोंडा और बहराइच के क्षेत्र शामिल थे। इसकी राजधानी श्रावस्ती थी।
गांधार – पाकिस्तान का पश्चिमी तथा अफ़ग़ानिस्तान का पूर्वी क्षेत्र। इसे आधुनिक कंदहार से जोड़ने की गलती कई बार लोग कर देते हैं जो कि वास्तव में इस क्षेत्र से कुछ दक्षिण में स्थित था।
चेदि – वर्तमान में बुंदेलखंड का इलाका।
वज्जि या वृजि’ – यह आठ गणतांत्रिक कुलों का संघ था जो उत्तर बिहार में गंगा के उत्तर में अवस्थित था तथा जिसकी राजधानी वैशाली थी। इसमें आज के बिहार राज्य के दरभंगा, मधुबनी व मुजफ्फरपुर जिले सम्मिलित थे।
वत्स या वंश – आधुनिक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद तथा मिर्ज़ापुर जिले।
पांचाल – पश्चिमी उत्तर प्रदेश। इसकी राजधानी अहिच्छत्र थी।
मगध – दक्षिण बिहार में अवस्थित। शतपथ ब्राह्मण में इसे ‘कीकट’ कहा गया है। आधुनिक पटना तथा गया जिले और आसपास के क्षेत्र।
मत्स्य या मच्छ – इसमें राजस्थान के अलवर, भरतपुर तथा जयपुर जिले के क्षेत्र शामिल थे।
मल्ल – यह भी एक गणसंघ था और पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाके इसके क्षेत्र थे।
सुरसेन या शूरसेन – इसकी राजधानी मथुरा थी।
ये सभी महाजनपद आज के उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान से बिहार तक और हिन्दुकुश से गोदावरी नदी तक में फैला हुआ था।
ईसापूर्व छठी सदी में अवंति के राजा प्रद्योत ने कौशाम्बी के राजा तथा प्रद्योत के दामाद उदयन के साथ लड़ाई हुई थी। उससे पहले उदयन ने मगध की राजधानी राजगृह पर हमला किया था। कोसल के राजा प्रसेनजित ने काशी को अपने अधीन कर लिया और बाद में उसके पुत्र ने कपिलवस्तु के शाक्य राज्य को जीत लिया। मगध के राजा बिंबिसार ने अंग को अपने में मिला लिया तथा उसके पुत्र अजातशत्रु ने वैशाली क लिच्छवियों को जीत लिया।

Comments

Popular posts from this blog

भारत के प्रमुख बांध एवं नदी परियोजनाएँ

भारत के प्रमुख बांध एवं नदी परियोजनाएँ इडुक्की परियोजना (Idukki Dam) – पेरियार नदी (Periyar River) – केरल (Kerala) उकाई परियोजना (Ukai Project) – ताप्ती नदी (Tapi river) – गुुजरात (Gujarat) काकड़ापारा परियोजना (Kakrapar project) – ताप्ती नदी (Tapi river) – गुुजरात (Gujarat) कोलडैम परियोजना (Koldam project) – सतलुज नदी – (Sutlej River) – हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) गंगासागर परियोजना (Ganga Sagar project) – चम्बल नदी (Chambal River) – मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) जवाहर सागर परियोजना (Jawahar Sagar Project) – चम्बल नदी (Chambal River) – राजस्थान (Rajasthan) जायकवाड़ी परियोजना (Jayakwadi project ) – गोदावरी नदी (Godavari river) – महाराष्ट्र (Maharashtra) टिहरी बाँध परियोजना (Tehri Dam Project) – भागीरथी नदी (Bhagirathi River) – उत्तराखण्ड (Uttarakhand) तिलैया परियोजना (Tilaiya Project) – बराकर नदी (Barakar River) – झारखंड (Jharkhand) तुलबुल परियोजना (Tulbul Project) – झेलम नदी (Jhelum River) – जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) दुर्गापुर बैराज परियोजना (Durgapur Barrage Pro...
भाग 4क : मूल कर्तव्य Part 4A Fundamental Duties more at   संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा शामिल |  स्वर्ण सिंह समिति  की सिफारिशों के आधार पर 10 मूल कर्तव्यों से शुरुवात , परन्तु 86वा संविधान संसोधन 2002 में 11 मूल कर्तव्य हो गए है | मूल कर्तव्य–भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह— 51क (1)  संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे| 51क (2)  स्वतंत्रता संग्राम के आदर्र्शों का सम्मान करे तथा  उनका पालन करे; 51क (3)  भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे| 51क (4)  देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे| 51क (5)  भारत के सभी लोगों में भाईचारे का  निर्माण करे तथा स्त्रियों के विरुद्ध प्रथाओ का त्याग करे | 51क (6)  हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे | 51क (7) पर्यावरण जीवों की रक्षा करे| 51क (8)  वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे| 51क (9)  सार्वजनिक संपत्ति ...

भाग 9क : नगर पालिकाएं : Part 9A MUNICIPALITIES

भाग 9क : नगर पालिकाएं : Part 9A MUNICIPALITIES Back to INDEX Page भाग 9क : नगर पालिकाएं : Part 9A  MUNICIPALITIES 243थ.(1) प्रत्येक राज्य में, इस भाग के उपबंधों के अनुसार,ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्र में संक्रमणगत क्षेत्र के लिए कोई नगर पंचायत का ,(ख) किसी  घुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद् का ,(ग) किसी वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का, गठन किया जाएगा 243न. स्थानों का आरक्षण 243प. नगरपालिकाओं की अवधि नियत तारीख से पांच वर्ष तक बनी रहेगी, 243फ. सदस्यता के लिए निरर्हताएँ 243ब(क) स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों 243भ. नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति और उनकी निधियाँ 243म. अनुच्छेद 243झ के अधीन गठित वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का भी पुनर्विलोकन करेगा 243य. नगरपालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा–किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं द्वारा लेखे रखे जाने और ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा करने के बारे में उपबंध कर सकेगा। 243यक. नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन, अनुच्छेद 243 में नि...