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Tuesday, 29 November 2016

भारत का संविधान : भाग 12: वित्त, सम्‍पत्ति, संविदाएं और वाद, PART 12 FINANCE, PROPERTY, CONTRACTS AND SUITS

भारत का संविधान : भाग 12: वित्त, सम्‍पत्ति, संविदाएं और वाद, PART 12 FINANCE, PROPERTY, CONTRACTS AND SUITS

264.”वित्त आयोग” से अनुच्छेद 280 के अधीन गठित वित्त आयोग है।
265.कोई कर विधि के प्राधिकार से ही अधिरोपित या संगृहीत किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
266. अनुच्छेद 267 के उपबंधों के अधीन , ”भारत की संचित निधि” और ”राज्य की संचित निधि”  होगी  |
267(1). ”भारत की आकस्मिकता निधि” ,  अनुच्छेद 115 या अनुच्छेद 116 के अधीन संसद द्वारा,अग्रिम धन देने के लिए राष्ट्रपति को समर्थ बनाने के लिए उक्त निधि राष्ट्रपति के व्ययनाधीन रखी जाएगी।
267(2) राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा,अनुच्छेद 205 या अनुच्छेद 206,जो ”राज्य की आकस्मिकता निधि” के नाम से ज्ञात होगी , अग्रिम धन देने के लिए राज्यपाल को समर्थ बनाने के लिए  व्ययनाधीन रखी जाएगी।

संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण

268.ऐसे स्टांप-शुल्क तथा औषधीय और प्रसाधन निर्मितियों पर ऐसे उत्पाद-शुल्क, जो संघ सूची में वर्णित हैं, भारत सरकार द्वारा उद्‍ग्रहीत किए जाएँगे, किंतु (ख) अन्य दशाओं में जिन-जिन राज्यों के भीतर ऐसे शुल्क उद्ग्रहणीय हैं, उन-उन राज्यों द्वारा, संगृहीत किए जाएँगे।
268क. (1) सेवाओं पर कर भारत सरकार द्वारा लिया जायेगा ।
269. माल के क्रय या विक्रय पर कर और माल के ट्रांसमिशन पर कर, भारत सरकार द्वारा लिए  जाएँगे किन्तु राज्यों को सौंप दिए जाएँगे|
270.उद्‍गृहीत कर और उनका संघ तथा राज्यों के बीच वितरण
271. कुछ शुल्कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार
272.संविधान (अस्सीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2000 की धारा 4 द्वारा लोप किया गया।
273. जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान |
275. कुछ राज्यों को संघ से अनुदान|
276.वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर|
278.संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा निरसित।
280.प्रत्येक पाँच वें वर्ष की समाप्ति पर या ऐसे पूर्वतर समय पर, जिसे राष्ट्रपति वित्त योग का गठन जो एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा।
285. संघ की संपत्ति को राज्य के कराधान से छूट।
286. राज्य की कोई विधि, माल के क्रय या विक्रय पर कोई कर अधिरोपित नहीं करेगी |
287. विद्युत पर करों से छूट
288. जल या विद्युत के संबंध में राज्यों द्वारा कराधान से कुछ दशाओं में छूट|
289. राज्यों की संपत्ति और आय को संघ के कराधान से छूट|
290. कुछ व्ययों और पेंशनों के संबंध में समायोजन|
290क. कुछ देवस्वम्‌ निधियों को वार्षिक संदाय
291. शासकों की निजी थैली (प्रिवी पर्स) की राशि को समाप्त | संविधान (छब्बीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 की धारा 2 निरसित।
291(2) मद्रास राज्य (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 1968 (1968 का 53) की धारा 4 द्वारा (14-1-1969 से) मद्रास के स्थान पर प्रतिस्थापित।
292. भारत सरकार द्वारा उधार लेना।
293. राज्यों द्वारा उधार लेना
297. राज्यक्षेत्रीय सागर-खंड या महाद्वीपीय मषनतट भूमि में स्थित मूल्यवान चीजों और अनन्य आर्थिक क्षेत्र के संपत्ति स्रोतों का संघ में निहित होना
298. संघ की और प्रत्येक राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, व्यापार या कारबार करने और किसी प्रयोजन के लिए संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन तथा संविदा करने पर
299. संविदाएँ–(1) संघ की या राज्य की कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग करते हुए की गई सभी संविदाएँ, यथास्थिति, राष्ट्रपति द्वारा या उस राज्य के राज्यपाल द्द्वारा की जाती है |
300. भारत सरकार भारत संघ के नाम से वाद ला सकेगी ,और किसी राज्य की सरकार उस राज्य के नाम से वाद ला सकेगी

अध्याय 4 — संपत्ति का अधिकार

300क. किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।

 

Wednesday, 23 November 2016

भारत का संविधान, भाग 11, संघ और राज्य के बीच सम्बन्ध, Constitution of India ,Part 11,RELATIONS BETWEEN THE UNION AND THE STATES


245. संसद भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगी और किसी राज्य का विधान-मंडल संपूर्ण राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगा।
246. संसद द्वारा और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु, संसद को सातवीं अनुसूची की सूची 1 में (जिसे इस संविधान में ”संघ सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।किसी राज्य के विधान-मंडल को भी, सातवीं अनुसूची की सूची 3 में (जिसे इस संविधान में ”समवर्ती सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है।किसी राज्य के विधान-मंडल को, सातवीं अनुसूची की सूची 2 में (जिसे इस संविधान में ”राज्य सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति है। संसद को भारत के राज्यक्षेत्र के ऐसे भाग के लिए 2[जो किसी राज्य] के अंतर्गत नहीं है, किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है, चाहे वह विषय राज्य सूची में प्रगणित विषय ही क्यों न हो।
247. कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद की शक्ति
248. संसद को किसी ऐसे विषय के संबंध में, जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में प्रगणित नहीं है, विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।
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Tuesday, 22 November 2016

दुनिया का सबसे पतला लैपटॉप भारत में लॉन्च

दुनिया का सबसे पतला लैपटॉप भारत में लॉन्च

ताइवान की टेक कंपनी Acer ने भारत में Swift 7 लैपटॉप लॉन्च कर दिया है. कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का सबसे पतला लैपटॉप है जो 1cm से भी पतला है. इसे सबसे पहले इसकी साल बर्लिन के IFA में पेश किया गया था. इसकी बिक्री 18 नवंबर से सिर्फ ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर होगी. इसकी कीमत 1 लाख रुपये है.
Swift 7 सिर्फ 0.39 इंच पतला है और इसका वजन लगभग 1.1 किलोग्राम है. इसमेमं 13.3 इंच की फुल एचडी आईपीएस डिस्प्ले दी गई है जिसका रिजोलुशन 1920X1080p है. इसकी स्क्रीन पर गोरिल्ला ग्लास 5 का प्रोटेक्शन दी गई है ताकि स्क्रैच न लगे.
हार्डवेयर की बात करें तो इसमें 7th जेनेरेशन Intel i5 प्रोसेसर दिया गया है जिसकी स्पीड 1.20GHz है. इसमें 8GB रैम और 256GB SSD दी गई है जो आम हार्ड डिस्क से काफी फास्ट होती है.
बेहतरीन ऑडियो क्वॉलिटी के लिए इसमें डॉल्बी ऑडियो और ऐसर ट्रू हार्मनी टेक्नॉलोजी दी गई है. इसमें दो यूएसबी टाइप सी पोर्ट्स हैं जो 3 गुना ज्यादा वायरलेस परफॉर्मेंस देंगे. कंपनी के मुताबिक इसे एक बार फुल चार्ज करके 9 घंटे तक चलाया जा सकता है.
ऐसर इंडिया के कंज्यूमर बिजनेस हेड चंद्रहास पाणिग्रही ने कहा है, ‘हम भारत में Swift लॉन्च करके काफी उत्साहित हैं. यह दुनिया का सबसे लैपटॉप है जिसमें पावरफुल परफॉर्मेंस और प्रीमियम डिजाइन दिया गया है. पिछले कुछ क्वॉर्ट्स से हम नई टेक्नॉलोजी से लैस अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे’
Courtesy : aajtak

भाग 9क : नगर पालिकाएं : Part 9A MUNICIPALITIES

भाग 9क : नगर पालिकाएं : Part 9A MUNICIPALITIES

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भाग 9क : नगर पालिकाएं : Part 9A  MUNICIPALITIES

243थ.(1) प्रत्येक राज्य में, इस भाग के उपबंधों के अनुसार,ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्र में संक्रमणगत क्षेत्र के लिए कोई नगर पंचायत का ,(ख) किसी  घुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद् का ,(ग) किसी वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का, गठन किया जाएगा
243न. स्थानों का आरक्षण
243प. नगरपालिकाओं की अवधि नियत तारीख से पांच वर्ष तक बनी रहेगी,
243फ. सदस्यता के लिए निरर्हताएँ
243ब(क) स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों
243भ. नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति और उनकी निधियाँ
243म. अनुच्छेद 243झ के अधीन गठित वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का भी पुनर्विलोकन करेगा
243य. नगरपालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा–किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं द्वारा लेखे रखे जाने और ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा करने के बारे में उपबंध कर सकेगा।
243यक. नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन, अनुच्छेद 243 में निर्दिष्ट राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा
243यघ. जिला योजना के लिए समिति
243यङ. महानगर योजना के लिए समिति
243यछ. निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन

भाग 9 : पंचायतीराज : Part 9 PANCHAYAT


भाग 9 : पंचायतीराज  : Part 9 PANCHAYAT

243. परिभाषाएँ।
243A. ग्राम सभा
243B. पंचायतों का गठन।
243C. पंचायतों की संरचना है।
243D. सीटों का रिजर्वेशन।
243E. पंचायतों आदि की अवधि
243F. सदस्यता के लिए निरर्हताएं।
243G. शक्तियों अधिकार और पंचायतों की जिम्मेदारियों।
243H. शक्तियों द्वारा करों, और फंड, पंचायतों लागू करने के लिए।
243I.वित्त आयोग के संविधान वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के लिए।
243J. पंचायतों के खातों की लेखा परीक्षा।
243K. पंचायतों के चुनाव।
243L. केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवेदन।
243M. भाग कुछ क्षेत्रों के लिए लागू करने के लिए नहीं।
243N. मौजूदा कानूनों और पंचायतों का बना रहना।
243O. चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप करने के लिए बार।

Vice Presidents of India, भारत के उपराष्ट्रपति

Vice Presidents of India, भारत के उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा। राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके कृत्यों का निर्वहन |उपराष्ट्रपति को उस अवधि के दौरान और उस अवधि के संबंध में, जब वह राष्ट्रपति के रूप में इस प्रकार कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और उन्मुक्तियाँ होंगी तथा वह ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का जो संसद, विधि द्वारा, अवधारित करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, हकदार होगा।

भारत के उपराष्ट्रपतियों की सूची

1 .सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1888–1975) ,मई 13 1952- मई 12, 1962 तक रहे | दोनों बार निर्विरोध ( १९५२ , १९५७ ) चुने गए | 
2..जाकिर हुसैन (1897–1969),मई 13 1962 – मई 12 1967 तक रहे | १९६२ के चुनाव में | 
3.वी वी गिरी (1894–1980), १९६७ के चुनाव में | मई 13, 1967 से मई 3, 1969 तक रहे  , राष्ट्रपति के चुनाव के लिए त्यागपत्र दे दिया |      
4.गोपाल स्वरूप पाठक (1896–1982),१९६९ क्व चुनाव में , अगस्त 31, 1969 से अगस्त 30,1974  तक रहे|
5.बी डी जत्ती(1912–2002),१९७४ के चुनाव में जीते | अगस्त 31 1974 से अगस्त 30,1979 | , १९७७ में कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किये गए |
6.मोहम्मद हिदायतुल्ला(1905–1992),१९७९ के चुनाव में जीते | अगस्त 31, 1979 से अगस्त 30, 1984 तक रहे | निर्विरोध चुने गए | १९८२ में कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे |
7.रामस्वामी वेंकटरमण (1910–2009)    , १९८४ के चुनाव में जीते ,अगस्त 31, 1984 से  जुलाई 27, 1987 तक रहे |     १९८७ में राष्ट्रपति  चुन लिए गए 
8.शंकर दयाल शर्मा (1918–1999), १९८७  के चुनाव में निर्विरोध , सितम्बर 3, 1987 से जुलाई 24, 1992  तक रहे 
9.के आर नारायणन (1920–2005), १९९२ के चुनाव      ,अगस्त 21, 1992 से जुलाई 24, 1997 तक रहे | राष्ट्रपति चुने गए |
10.कृष्णकांत (1927–2002) , १९९७ क्व चुनाव में जीते, एक स्वतंत्र संग्राम सेनानी दंपत्ति से जेल में जन्म हुआ| इनकी मृत्यु कार्यकाल में हो गयी | अगस्त 21, 1997 से जुलाई 27, 2002 तक रहे |
11.भैरो सिंह शेखावत (1923–2010) , १९९२ के चुनाव में जीते | राजस्थान के 3 बार मुख्यमंत्री रहे | अगस्त 19, 2002 से जुलाई 21, 2007 तक रहे |
12.हामिद अंसारी (born in 1937), २००७, २०१२ के चुनाव में जीते | भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी |     अगस्त 11, 2007 से वर्तमान

भाग 8: संघ राज्‍य क्षेत्र : Part 8

Constitution of India Part 8 , The Union Territories, भाग 8: संघ राज्‍य क्षेत्र



भाग 8: संघ राज्‍य क्षेत्र : Part 8


239(1) प्रत्येक संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा किया जाएगा।
239(2) राष्ट्रपति किसी राज्य के राज्यपाल को किसी निकटवर्ती संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक नियुक्त कर सकेगा
239क. कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए स्थानीय विधान-मंडलों या मंत्रि-परिषदों का या दोनों का सृजन (संविधान (चौदहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1962)
239(क)(क). संविधान (उनहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1991 के प्रारंभ से दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र  तथा उसके प्रशासक का पदाभिधान उप-राज्यपाल होगा।
परंतु उप-राज्यपाल और उसके मंत्रियों .... more at 

भारत का संविधान – भाग 6- राज्य , Constitution of India, Part 6 State

भारत का संविधान – भाग 6- राज्य , Constitution of India, Part 6 State


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भाग 6 , राज्य , Part 6 State 

152. परिभाषा– इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, ” राज्य”  (जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर)

राज्यपाल

153.प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा
154. राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
155. राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा।
156.  राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा।
157. कोई व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त होने का पात्र तभी होगा जब वह भारत का नागरिक है और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है।159. राज्यपाल द्वारा शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष करेगा
161. किसी राज्य के राज्यपाल को उस विषय संबंधी, जिस विषय पर उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश में निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति होगी।

मंत्रि-परिषद

163. राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।
163(3) इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जाँच नहीं की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को काई सलाह दी, और यदि दी तो क्या दी।
164 मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा तथा मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपने पद धारण करेंगे|
164(क) किसी राज्य की मंत्रि-परिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या केपंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी|परंतु किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या बारह से कम नहीं होगी :
164(2) मंत्रि-परिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी।

राज्य का महाधिवक्ता

165(1) प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित किसी व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करेगा।
165(2) महाधिवक्ता का यह कर्तव्य होगा कि वह उस राज्य की सरकार को विधि संबंधी ऐसे विषयों पर सलाह दे
165(3) महाधिवक्ता, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राज्यपाल अवधारित करे
सरकारी कार्य का संचालन
166. किसी राज्य की सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की हुई कही जाएगी।
167.प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य होगा कि वह राज्यपाल को , राजपाल द्वारा मांगे गए सूचना दे |
साधारण168 (1) प्रत्येक राज्य के लिए एक विधान-मंडल होगा जो राज्यपाल (2) किसी राज्य के विधान-मंडल के दो सदन हैं वहां एक का नाम विधान परिषद और दूसरे का नाम विधानसभा होगा और केवल एक सदन है वहां उसका नाम विधानसभा होगा।
170. विधानसभाओं की संरचना,प्रत्येक राज्य की विधानसभा उस राज्य में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने हुए पाँच सौ से अनधिक और साठ से अन्यून सदस्यों से मिलकर बनेगी।
172.प्रत्येक राज्य की प्रत्येक विधानसभा, यदि पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो, अपने प्रथम अधिवेशन  के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष तक बनी रहेगी, इससे अधिक नहीं और पाँच वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति का परिणाम विधानसभा का विघटन होगा:|
173. राज्य के विधान-मंडल की सदस्यता के लिए अर्हता(क) वह भारत का नागरिक है (ख)  कम से कम पच्चीस वर्ष की आयु का और विधान परिषद के  लिए कम से कम तीस वर्ष की आयु का|
174. राज्यपाल, समय-समय पर, राज्य के विधान-मंडल के सदन या प्रत्येक सदन को, अधिवेशन  के लिए आहूत करेगा
174(2) राज्यपाल (क) सदन का या किसी सदन का सत्रावसान कर सकेगा(ख) विधानसभा का विघटन कर सकेगा।
176(1) राज्यपाल, विधानसभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात्‌ प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ मेंट विधानसभा में या विधान परिषद वाले राज्य की दशा में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा
177.प्रत्येक मंत्री और राज्य के महाधिवक्ता को यह अधिकार होगा कि वह उस राज्य की विधानसभा में या विधान परिषद वाले राज्य की दशा में दोनों सदनों में बोले और उनकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले|

राज्य के विधान-मंडल के अधिकारी

178. विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
179. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना
181. जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना
182.विधान परिषद वाले प्रत्येक राज्य की विधान परिषद, यथाशीघ्र, अपने दो सदस्यों को अपना सभापति और उपसभापति चुनेगी
183. सभापति और उपसभापति का पद रिक्त होना
211.उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश के अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए, आचरण के विषय में राज्य के विधान-मंडल में कोई चर्चा नहीं होगी।
212. न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जाँच न किया जाना
213. विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति,परंतु राज्यपाल, राष्ट्रपति के अनुदेशों के बिना, कोई अध्यादेश प्रख्यापित नहीं करेगा
214. प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।
215. उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना
216. प्रत्येक उच्च न्यायालय मुख्‍य न्यायमूर्ति और ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझे।
217.भारत के मुख्‍य न्यायमूर्ति से, उस राज्य के राज्यपाल से और मुख्‍य न्यायमूर्ति से भिन्न किसी न्यायाधीश की नियुक्ति की दशा में उस उच्च न्यायालय के मुख्‍य न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात्‌, राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश को नियुक्त करेगा
220. स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात्‌ विधि-व्यवसाय पर निर्बंधन
221. न्यायाधीशों के वेतन आदि
222. किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण
223. कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति224. अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति |
224क. उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति-
227. सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति |
228. कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण–यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान्‌ प्रश्न अंतर्वलित है जिसका अवधारण मामले के निपटारे के लिए आवश्यक है तो वह उस मामले को अपने पास मंगा लेगा
229. उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय तथा नियुक्तियाँ उस न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति करेगा
231. दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना
233. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
234. न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती,  राज्य की न्यायिक सेवा में नियुक्ति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा, राज्य लोक सेवा आयोग से और ऐसे राज्य के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात्‌‌, और राज्यपाल द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार की जाएगी।
235.जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण
237. राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगा कि इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंध और उनके अधीन बनाए गए नियम ऐसी तारीख से, जो वह इस निमित्त नियत करे, ऐसे अपवादों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए,  जो ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएँ, राज्य में किसी वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटों के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे राज्य की न्यायिक सेवा में नियुक्त व्यक्तियों के संबंध में लागू होते हैं।

भाग 5 संघ , Part 5 THE UNION

भाग 5 संघ , Part 5 THE UNION

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति
राष्ट्रपति वास्ताव् में संवैधानिक प्रमुख होता है, यह एक शक्ति के पद की तुलना में , सम्मान का पद है | राष्ट्रपति इकलौता ऐसा पद है जो सैन्य के तीनो अंगो का प्रमुख तथा विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका से सम्बध्ध्ह है |भारत में अब तक सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी (64 वर्ष) | राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में 50सदस्यों से अनुमोदन होना चाहिए | 1967 में सर्वाधिक 17 प्रत्याशी थे राष्ट्रपति पद के लिए | राष्ट्रपति चुनाव में जमानत राशी 1500 रूपए है | राष्ट्रपति निर्वाचन से सम्बंधित सभी वाद सर्वोच्च न्यायालय से ही होते है राष्ट्रपति के पद को शपथ ससर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिया जाता है | भारत में एक व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति के पद चुना जा सकता है , इस बारे में कोई उल्लेख संविधान में नहीं है | USA में एक ही व्यक्ति मात्र 2 बार ही राष्ट्रपति के लिए चुना जा सकता है, सिर्फ FD रूसवेल्ट ही USA में ४ बार राष्ट्रपति चुने गए थे| राष्ट्रपति अपना त्याग पात्र उपराष्ट्रपति को सौंपता है, राष्ट्रपति की मृत्यु या इस्तीफे की वजह से रिक्त हुए पद का चुनाव 180 दिनों में हो जाना चाहिए |
वीटो शक्तियाँ
विधायिका की किसी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने की शक्ति वीटॉ शक्ति कहलाती है संविधान राष्ट्रपति को तीन प्रकार के वीटो देता है।
(1) पूर्ण वीटो – निर्धारित प्रकिया से पास बिल जब राष्ट्रपति के पास आये (संविधान संशोधन बिल के अतिरिक्त)] तो वह् अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणा कर सकता है किंतु यदि अनु 368 के अंतर्गत कोई बिल आये तो वह अपनी अस्वीकृति नही दे सकता है
(2) निलम्बनकारी वीटो – संविधान संशोधन अथवा धन बिल के अतिरिक्त राष्ट्रपति को भेजा गया कोई भी बिल वह संसद को पुर्नविचार हेतु वापिस भेज सकता है किंतु संसद यदि इस बिल को वापिस पास कर के भेज दे तो उसके पास सिवाय इसके कोई विकल्प नही है उस बिल को स्वीकृति दे दे। इस वीटो को वह अपने विवेकाधिकार से प्रयोग लेगा। इस वीटो का प्रयोग अभी तक संसद सदस्यॉ के वेतन बिल भत्ते तथा पेंशन नियम संशोधन 1991 मे किया गया था। यह एक वित्तीय बिल था। राष्ट्रपति वेंकट रमण ने इस वीटो का प्रयोग इस आधार पर किया कि यह बिल लोकसभा मे बिना उनकी अनुमति के लाया गया था।
(3) पाकेट वीटो – संविधान राष्ट्रपति को स्वीकृति अस्वीकृति देने के लिये कोई समय सीमा नही देता है यदि राष्ट्रपति किसी बिल पे कोई निर्णय ना दे ([सामान्य विधेयक ) तो इसे पाकेट वीटो का कहलाता है | पेप्सू बिल 1956 तथा भारतीय डाक बिल 1984 मे राष्ट्रपति ने इस वीटो का प्रयोग किया था।
राष्ट्रपति के मात्र दो विवेकाधिकार है1. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना
2. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में लोकसभा को भंग करना

राष्ट्रपति को रबर स्टाम्प नहीं कहा जा सकता क्युकी उसकी स्तिथि मैच रेफ़री या इमरजेंसी लाइट की तरह होती है |
52.भारत का राष्ट्रपति–भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
53.संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
53(2) संघ के रक्षा बलों का सर्वोच्च समादेश राष्ट्रपति में निहित होगा।
54राष्ट्रपति का निर्वाचक मण्डल –राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचकगण के सदस्य करेंगे जिसमें–
(क) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यऔर
(
ख) राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यहोंगे( केवल दिल्ली और पोंडिचेरी के विधान सभा सदस्यों को ही वोट का अधिकार है, संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992) नोट :- राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में 5000 सदस्य है |
55. राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति का उल्लेख |
55(3) राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।| नोट -1971 की जनगणना के अनुसार , या 2026 के पश्चात् के जनगणना को लिया जायेगा |
नोट :- मत मूल्य के बारे में कुछ तथ्य विभिन्न  राज्यों के विधान सभा के सदस्यों का चुनाव विभिन्न मतों से होता है , इसलिए निर्वाचक का मत मूल्य का प्रयोग किया जाता है एक MLA का मत मूल्य= 1971 की जनसँख्या के अनुसार  (राज्य की जनसँख्या/ MLA)*1/1000
किसी सांसद का वोट वैल्यू =
भारत के सभी निओर्वाचित MLA की वोट वैल्यू/सभी निर्वाचित सांसद (543+ 233) = 708

उत्तर प्रदेश की MLA की वोट वैल्यू सर्वाधिक २०८१ तथा न्यूनतम सिक्किम (7), अरुणाचल प्रदेश की 8 है |
56(1) राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा|
56(क) राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा|
58. राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएँ—
(क) भारत का नागरिक है,
(ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, और
(ग) लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।
58(2) सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्ति , राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा( नोट – परन्तु इसमें राज्यपाल या मंत्री शामिल नही है, यानि की लाभ के पद पर न हो , संविधान में लाभ के पद को परिभाषित नहीं किया गया है )
59.राष्ट्रपति के पद के लिए शर्तें – राष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा , राष्ट्रपति अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा, राष्ट्रपति, बिना किराया दिए, अपने शासकीय निवासों के उपयोग का हकदार होगा, भत्तों राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।
60.राष्ट्रपति का शपथ
61.राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया,–>  जो कम से कम चौदह दिन की ऐसी लिखित सूचना के दिए जाने के पश्चात्‌ प्रस्तावित किया गया है जिस पर उस सदन ( महाभियोग चलने की प्रक्रिया किसी भी सदन में प्रस्तुत की जा सकती है )  की कुल सदस्य संख्‍या के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों ने हस्ताक्षर करके उस संकल्प को प्रस्तावित करने ,और  उस सदन की कुल सदस्य संख्‍या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा ऐसा संकल्प पारित  किया गया हो ।
दुसरे  सदन (आरोप का अन्वेषण करने के पश्चात् )  की कुल सदस्य संख्‍या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति हो हटना होता है |
62.राष्ट्रपति की मृत्यु या इस्तीफे की वजह से रिक्त हुए पद का चुनाव १८० दिनों में हो जाना चाहिए |
63.भारत का उपराष्ट्रपति–भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
64. उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना–उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा:परंतु जिस किसी अवधि के दौरान उपराष्ट्रपति, अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है, उस अवधि के दौरान वह राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और वह अनुच्छेद 97 के अधीन राज्य सभा के सभापति को संदेय वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होगा। उपराष्ट्रपति  को वेतन नहीं मिलता है , उसे सिर्फ सभापति , राज्यसभा का वेतन मिलता है |
66(1).उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।
66(2).उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा |
66(3). उपराष्ट्रपति की अहर्ताए-
(क) भारत का नागरिक है
(ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, और
(ग) राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।66(4). कोई लाभ का पद धारण करता है, उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा।
67.उपराष्ट्रपति की पदावधि– उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा: परंतु–
67(क) उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;
(ख) उपराष्ट्रपति, राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया है और जिससे लोकसभा सहमत है; किंतु प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दे दी गई हो|
67.उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
72. राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण कर सकता है , परन्तु सेना अधिकारी को सेना न्यायलय द्वारा दिया गया दंड में यह अनुच्छेद लागु नही होता |
क्षमा – किसी सजा को सम्पूर्ण समाप्त
लघुकरण – सजा की पद्धति बदलकर उसे कम करना
परिहार – सजा की पद्धति बिना बदलकर उसे कम करना
विराम – किसी विशेष परिस्तिथि में सजा को कम या समाप्त करना 
अविलंबन – सजा को रोक देना
मंत्रि-परिषद
74. राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद होगी , राष्ट्रपति किसी विधेयक को सलाह देकर वापस कर सकता है , परन्तु वह यह सिर्फ एक बार कर सकता है |
74क मंत्रि-परिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्‍या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्‍या के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहींहोगी।
भारत का महान्यायवादी
76. राष्ट्रपति , किसी  उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करेगा।
76(2) महान्यायवादी  भारत सरकार को विधि संबंधी ऐसे विषयों पर सलाह देता है |
सरकारी कार्य का संचालन
77. भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से की हुई कही जाएगी।राष्ट्रपति द्वारा ही मंत्रिपद का बटवारा किया जाता है |
78.राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य

साधारण79.संसद का गठन–संघ के लिए एक संसद‌ होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोकसभा होंगे।
80. राज्य सभा की संरचना
81.लोकसभा की संरचना
83. राज्य सभा का विघटन नहीं होगा, किन्तु उसके सदस्यों में से यथासंभव निकटतम एक-तिहाई सदस्य, संसद‌ द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त किए गए उपबंधों के अनुसार, प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर यथाशक्य शीघ्र निवृत्त हो जाएँगे।
83(2) लोकसभा,अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष तक बनी रहेगी परन्तु जब आपात की स्थिति  में एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी उसके पश्चात् उसका विस्तार किसी भी दशा में छह मास की अवधि से अधिक नहीं होगा।
83.कोई व्यक्ति संसद‌ के किसी स्थान को भरने के लिए चुने जाने के लिए अर्हित  , वह भारत का नागरिक है और ,वह राज्य सभा में स्थान के लिए कम से कम तीस वर्ष की आयु का और लोकसभा में स्थान के लिए कम से कम पच्चीस वर्ष की आयु का है|
86. राष्ट्रपति, संसद‌ के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकेगा
86(1)राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण –लोकसभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात्‌ प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में एक साथ समवेत संसद‌ के दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और संसद‌ को उसके आह्वान के कारण बताएगा।
88. प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की किसी संयुक्त बैठक में और संसद‌ की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले,परन्तु मत नहीं दे सकता |
संसद के अधिकारी89.भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होगा।
97.संसद‌ के प्रत्येक सदन का पृथक् सचिवीय कर्मचारिवृंद होगा;
कार्य संचालनसंसद‌ और उसके सदस्यों की शक्तियाँविशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ105(2). संसद‌ के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों को  संसद‌ में वाक्‌‌-स्वातंत्र्य होगा, उसके विरूद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी संविधान (चवालीसवाँ संशोधन)108(1). संयुक्त बैठक , यदि किसी विधेयक के एक सदन द्वारा पारित किए जाने और दूसरे सदन को पारेषित किए जाने के पश्चात्‌, दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकर कर दिया गया है, या दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हो गए हैं, या  विधेयक पारित किए बिना छह मास से अधिक बीत गए हैं ( धन विधेयक को छोडकर )110. ”धन विधेयक” की परिभाषा कोई विधेयक धन विधेयक समझा जाएगा यदि उसमें केवल निम्नलिखित ,किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने का या कोई प्रत्याभूति देने का विनियमन , भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा |
वित्तीय विषयों के संबंध में प्रक्रिया
112. वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट)
112(3)
 भारत की संचित निधि पर भारित व्यय (क) राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और भत्ते तथा ,राज्यसभा के सभापति और उपसभापति के तथा लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते,ऐसे ऋण भार, जिनका दायित्व भारत सरकार पर है|
115.अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान ,अतिरिक्त व्यय की चालू वित्तीय वर्ष के दौरान आवश्यकता पैदा हो गई है|
123.संसद‌ के विश्रांतिकाल में अध्‍यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति, छह सप्ताह की समाप्ति पर या यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले दोनों सदन उसके अननुमोदन का संकल्प पारित कर देते हैं तो, इनमें से दूसरे संकल्प के पारित होने पर प्रवर्तन में नहीं रहेगा|
124.उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन– भारत का एक उच्चतम न्यायालय होगा जो भारत के मुख्‍य न्यायमूर्ति ,सात से अधिक अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा।
125. न्यायाधीशों के वेतन आदि |126.कार्यकारी मुख्‍य न्यायमूर्ति की नियुक्ति
127. तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति
129.उच्चतम न्यायालय अभिलेख  न्यायालय होगा और उसको अपने अवमान के लिए दंड देने की शक्ति सहित ऐसे न्यायालय की सभी शक्तियाँ होंगी।
133.उच्च न्यायालयों से सिविल विषयों से संबंधित अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता
137.
संसद‌ विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को अनुच्छेद 32 के खंड (2) में वर्णित प्रयोजनों से भिन्न किन्हीं प्रयोजनों के लिए ऐसे निदेश, आदेश या रिट, जिनके अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध,  अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिट हैं, या उनमें से कोई निकालने की शक्ति प्रदान कर सकेगी।
143.यदि किसी समय राष्ट्रपति को प्रतीत होता है कि विधि या तनय का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है,  जो ऐसी प्रकृति का और ऐसे व्यापक महत्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तो वह उस प्रश्न को विचार करने के लिए उस न्यायालय को निर्देशित कर सकेगा और वह न्यायालय, ऐसी सुनवाई के पश्चात्‌ जो वह ठीक समझता है, राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय प्रतिवेदित कर सकेगा।
146.उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियाँ भारत का मुख्‍य न्यायमूर्ति करेगा या उस न्यायालय का ऐसा अन्य न्यायाधीश या अधिकारी करेगा जिसे वह निर्दिष्ट करे|
151.संपरीक्षा प्रतिवेदन– (1) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के संघ के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको संसद‌ के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।
(2) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के किसी राज्य के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को उस राज्य के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा।

भाग 4क : मूल कर्तव्य Part 4A Fundamental Duties

संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा शामिल | स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 10 मूल कर्तव्यों से शुरुवात , परन्तु 86वा संविधान संसोधन 2002 में 11 मूल कर्तव्य हो गए है |
मूल कर्तव्य–भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह—
51क (1) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे|
51क (2) स्वतंत्रता संग्राम के आदर्र्शों का सम्मान करे तथा  उनका पालन करे;
51क (3) भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे|
51क (4) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे|
51क (5) भारत के सभी लोगों में भाईचारे का  निर्माण करे तथा स्त्रियों के विरुद्ध प्रथाओ का त्याग करे |
51क (6) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे |
51क (7)पर्यावरण जीवों की रक्षा करे|
51क (8) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे|
51क (9) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे|
51क (10) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के प्रयास करे जिसके द्वारा राष्ट्र निरंतर बढ़ते |
51क (11) यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले बालक को शिक्षा के अवसर प्रदान करे(86वा संविधान संसोधन 2002)

Friday, 18 November 2016


भाग 4क : मूल कर्तव्य Part 4A Fundamental Duties

संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा शामिल | स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 10 मूल कर्तव्यों से शुरुवात , परन्तु 86वा संविधान संसोधन 2002 में 11 मूल कर्तव्य हो गए है |
मूल कर्तव्य–भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह—
51क (1) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे|
51क (2) स्वतंत्रता संग्राम के आदर्र्शों का सम्मान करे तथा  उनका पालन करे;
51क (3) भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे|
51क (4) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे|
51क (5) भारत के सभी लोगों में भाईचारे का  निर्माण करे तथा स्त्रियों के विरुद्ध प्रथाओ का त्याग करे |
51क (6) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे |
51क (7)पर्यावरण जीवों की रक्षा करे|
51क (8) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे|
51क (9) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे|
51क (10) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के प्रयास करे जिसके द्वारा राष्ट्र निरंतर बढ़ते |
51क (11) यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले बालक को शिक्षा के अवसर प्रदान करे(86वा संविधान संसोधन 2002)

भाग 3: मूल अधिकार, Part 3 Fundamental Rights


अनुच्छेद 32 को डा अम्बेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है |

12. परिभाषा–इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, ”राज्य” के अंतर्गत भारत की सरकार और संसद तथा राज्यों में से प्रत्येक राज्य की सरकार और विधान-मंडल तथा भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन सभी स्थानीय और अन्य प्राधिकारी हैं।
13. मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियाँ
समता का अधिकार(14 -18)
14. विधि के समक्ष समता
15. धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध
16. लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
17. अस्पृश्यता का अंत
18. उपाधियों का अंत 
स्वातंत्र्य-अधिकार(19-22)
19. वाक्‌-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण-,वाक्‌-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य का,शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन का,संगम या संघ बनाने का,भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का
20. अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण–(1) कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए तब तक सिद्धदोष नहीं ठहराया जाएगा, जब तक कि उसने ऐसा कोई कार्य करने के समय, जो अपराध के रूप में आरोपित है, किसी प्रवृत्त विधि का अतिक्रमण नहीं किया है या उससे अधिक शास्ति का भागी नहीं होगा जो उस अपराध के किए जाने के समय प्रवृत्त विधि के अधीन अधिरोपित की जा सकती थी।
(2) किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा।
(3) किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
21. प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
21क. शिक्षा का अधिकार–राज्य, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का ऐसी रीति में, जो राज्य विधि द्वारा, अवधारित करे, उपबंध करेगा। संविधान (छियासीवाँ संशोधन,86,2002) अधिनियम, 2002
22. कुछ दशाओं में गिरपतारी और निरोध से संरक्षण
शोषण के विरुद्ध ‍अधिकार
23. मानव के दुर्व्यापार और बलात्‌‌श्रम का प्रतिषेध
24. कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध–चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार(25-28)
25. अंतःकरण की और धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता  बशर्ते  लोक व्यवस्था, सदाचार
26. धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
27. किसी भी व्यक्ति को ऐसे करों के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा जिसे किसी धर्म पोषण में व्यय किए जाते हैं।

28(1) राज्य-निधि से पूर्णतः पोषित किसी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।
28(2)उपरोक्त बात ऐसी शिक्षा संस्था को लागू नहीं होगी जिसका प्रशासन राज्य करता है किंतु जो किसी न्यास के अधीन है|

28(3) राज्य से मान्यता प्राप्त या राज्य-निधि से सहायता पाने वाली शिक्षा संस्था में  धार्मिक शिक्षा में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा ।
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार(29-30)
29. अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण, लेकिन भारत के संविधान में कही पर अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित नही किया गया है |
29(1). नागरिकों को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।
29(2). राज्य द्वारा पोषित या राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा।
30. शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक-वर्गों का अधिकार
30(1) धर्म या भाषा पर आधारित शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार|
30(2) ऐसे  शिक्षा संस्थाओं को सहायता देने में राज्य इस आधार पर विभेद नहीं करेगा |
31. संपत्ति का अनिवार्य अर्जन। –संविधान (चवालीसवाँ संशोधन,44,1978) अधिनियम द्वारा निरसित।
सांविधानिक उपचारों का अधिकार
32. कुछ अधिकारों को प्रवर्तित कराने के  समुचित कार्यवाहियों द्वारा उच्चतम न्यायालय में समावेदन करने का अधिकार प्रत्याभूत किया जाता है यानि कि कुछ अधिकारों का उलंघन की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय कुछ रिटे जारी कर सकता है |
32(2) उच्चतम न्यायालय को ऐसे निदेश या आदेश या रिट, जिनके अंतर्गत , जो भी समुचित हो, निकालने की शक्ति होगी।
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण(Habeas Corpus)
    बंदी को मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना
  • परमादेश(Mandamus)
    कार्यपालिका को अपने संवैधानिक कर्तव्व्य याद दिलाना हो
  • प्रतिषेध(Prohibition)
    सुप्रीम कोर्ट द्वारा निचली अदालतों को जारी जब सम्बंधित न्यायालय मुकदमो की सुनवाई में सक्षम न हो या न्यायालय पर संदेह हो तो मुकदमो की सुनवाई तत्काल रोक दी  जाती है
  • अधिकार-पृच्छा(Quo Warranto) –
    गैर क़ानूनी ढंग से पद के दुरूपयोग पर कार्यपालिका को जारी
  • उत्प्रेषण रिट
    सुप्रीम कोर्ट द्वारा निचली अदालतों को जारी जब सम्बंधित न्यायालय मुकदमो की सुनवाई में सक्षम न हो  या कोई कठिन विषय सार्वित हो |
34. मार्शल लॉ : मार्शल ला के तहत किसी स्थान, क्षेत्र का शासन सेना को सौप दिया जाता है . भारत में पूरे देश में मार्शल लॉ का कोई प्राबधान नहीं है 1958 में आर्म्ड फाॅर्स स्पेशल पॉवर एक्ट ( अप्स्पा) लागु किया गया . इसे के तहत किसी क्षेत्र में सेना का शासन लगाया जा सकता है

Tuesday, 15 November 2016

अब बैंक में नोट बदलवाने के बाद उंगली पर लगेगी स्याही
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नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लगातार लंबी कतारों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नायाब तरीका निकाला है. अब जो भी शख्स बैंक में नोट बदलवा लेगा, उसकी उंगली पर स्याही का निशान लगाया जाएगा.आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि मंगलार से जो एक बार नोट एक्सचेंज करा लेगा, उसके हाथ पर ना मिटने वाली स्याही का निशान लगा दिया जाएगा. ऐसे में वैध जमा करने वालों को कोई असुविधा नहीं होगी.दरअसल, कुछ लोग काले धन सफेद कराने के लिए आम लोगों को बार-बार लाइन में लगा दे रहे हैं. इसी के बाद सरकार ने यह नायाब फैसला किया.दास ने बताया कि धार्मिक स्थलों को कम मूल्य की मुद्रा में मिल रहे दान को तत्काल बैंकों में जमा कराने की अपील की गई है ताकि मुद्रा आपूर्ति को बढ़ाया जा सके. डाकघरों और जिला सहकारी बैंकों में नकदी उपलब्धता बढ़ाई गई है. साथ ही सरकार जन-धन खातों पर करीब से नजर रखे हुए है.इधर, नकदी की समस्या से परेशान लोग मंगलवार सुबह से ही एटीएम और बैंकों के बाहर कतारों में लगे हैं, ताकि चलन से बाहर कि.......

Thursday, 10 November 2016

Prime Ministers of India

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Prime Ministers of India

Jnehru.jpgLal Bahadur Shastri (cropped).jpgIndira Gandhi 1977.jpgMorarji Desai (portrait).pngCharan Singh (cropped).jpgRajiv Gandhi (1987).jpgV. P. Singh (cropped).jpgChandra Shekhar (cropped).jpgP V Narasimha Rao.pngDeve Gowda BNC.jpgInder Kumar Gujral 071.jpgAtal Bihari Vajpayee (cropped).jpgPrime Minister Manmohan Singh in WEF ,2009 (cropped).jpg
PM Modi Portrait(cropped).jpg
Prime Ministers Of India
भारत के प्रधानमंत्री संक्षेप में

Name
Name in Hindi/DOB
MP
Loksabha
Party/Alliance
Period
Days
Appointed By
1
Jawaharlal Nehru
जवाहर लाल नेहरु (1889–1964)
MP for Phulpur
लोकसभा निर्वाचन 1952 (1st),1957 (2nd),1962 (3rd)
Indian National Congress
15 August 1947-27 May 1964
16 years, 286 days
Lord Mountbatten/Rajendra Prasad

Gulzarilal Nanda गुलजारी लाल नंदा (1898–1998)
MP for Sabarkantha
लोकसभा निर्वाचन 3rd
Indian National Congress
27 May 1964- 9 June 1964
13 days
Sarvepalli Radhakrishnan
2
Lal Bahadur Shastri
लाल बहादुर शास्त्री (1904–1966)
MP for Allahabad
लोकसभा निर्वाचन 3rd
Indian National Congress
9 June 1964-11 January 1966
1 year, 216 days

Gulzarilal Nanda
गुलजारी लाल नंदा (1898–1998)
MP for Sabarkantha
लोकसभा निर्वाचन 3rd
Indian National Congress
11 January 1966- 24 January 1966
13 days
3
Indira Gandhi
इंदिरा गाँधी
(1917–1984)
MP for Rae Bareli
लोकसभा निर्वाचन
3, 1967(4th), 1971(5th)
Indian National Congress
24 January 1966- 24 March 1977
11 years, 59 days
V. V. Giri
4
Morarji Desai
मोरारजी देसाई (1896–1995)
MP for Surat
लोकसभा निर्वाचन 1977(6th)
Janata Party
24 March 1977- 28 July 1979
2 years, 126 days
B. D. Jatti
5
Charan Singh
चरण सिंह (1902–1987)
MP for Baghpat
लोकसभा निर्वाचन 6th
Janata Party (Secular)with INC
28 July 1979-14 January 1980
170 days
Neelam Sanjiva Reddy

Indira Gandhi
इंदिरा गाँधी (1917–1984)
MP for Medak
लोकसभा निर्वाचन 7th(1980)
Indian National Congress(I)
14 January 1980-31 October 1984
4 years, 291 days
Zail Singh
6
Rajiv Gandhi
राजीव गाँधी (1944–1991)
MP for Amethi
लोकसभा निर्वाचन 7th, 1984(8th)
Indian National Congress(I)
31 October 1984-2 December 1989
5 years, 32 days
Zail Singh
7
V. P. Singh
वी पी सिंह (1931–2008)
MP for Fatehpur
लोकसभा निर्वाचन 1989(9th)
Janata Dal(National Front)
2 December 1989-10 November 1990
343 days
R. Venkataraman
8
Chandra Shekhar
चन्द्र शेखर (1927–2007)
MP for Ballia
लोकसभा निर्वाचन 9th
Samajwadi Janata Party with INC
10 November 1990-21 June 1991
223 days
R. Venkataraman
9
P. V. Narasimha Rao
पी वी नरसिम्हा राव (1921–2004)
MP for Nandyal
लोकसभा निर्वाचन 1991(10th)
Indian National Congress(I)
21 June 19910-16 May 1996
4 years, 330 days
R. Venkataraman
10
Atal Bihari Vajpayee
अटल विहारी वाजपई (born 1924)
MP for Lucknow
लोकसभा निर्वाचन 1996(11th)
Bharatiya Janata Party
16 May 1996 – 1 June 1996
16 days
Shankar Dayal Sharma
11
H. D. Deve Gowda
एच डी देवेगोड़ा (born 1933)
MP (Rajya Sabha) for Karnataka
लोकसभा निर्वाचन 11th  
Janata Dal(United Front)
1 June 1996-21 April 1997
324 days    
Shankar Dayal Sharma
12
Inder Kumar Gujral
इंद्रा कुमार गुजराल (1919–2012)
MP (Rajya Sabha) for Bihar
लोकसभा निर्वाचन 11th
Janata Dal(United Front)
21 April 1997-19 March 1998
332 days
Shankar Dayal Sharma

Atal Bihari Vajpayee
अटल विहारी वाजपई (born 1924)
MP for Lucknow
लोकसभा निर्वाचन 1998(12th), 1999(13th)
Bharatiya Janata Party(NDA)
19 March 1998- 22 May 2004
6 years, 64 days
K. R. Narayanan
13
Manmohan Singh
मन मोहन सिंह(born 1932)
MP (Rajya Sabha) for Assam
लोकसभा निर्वाचन 2004(14th), 2009(15th)
Indian National Congress, UPA
22 May 2004- 26 May 2014
10 years, 4 days
A. P. J. Abdul Kalam/Pratibha Patil
14
Narendra Modi
नरेन्द्र मोदी(born 1950)
MP for Varanasi
लोकसभा निर्वाचन 2014(16th)
Bharatiya Janata Party(NDA)
26 May 2014-  
Pranab Mukherjee

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Wednesday, 9 November 2016

Governors, Governor Generals, Viceroys of India

Governors, Governor Generals, Viceroys of India

File:Lord Viscount Canning.jpgRobert Bulwer-Lytton by Nadar.jpgGeorge Robinson 1st Marquess of Ripon.jpg Lord Canning, Liton, Rippon Pic Courtesy : wikimedia
भारत के गवर्नर जनरल (या, 1858 से 1947 तक, भारत के वायसराय और गवर्नर जनरल) भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश राज का पद था। गवर्नर जनरल ऑफ द प्रेसीडेंसी ऑफ फोर्ट विलियम के पद को रेगुलातिंग एक्ट  1773 में सृजित किया गया था। 1947 में जब भारत और पाकिस्तान को आजादी के बाद  वायसराय की पदवी को हटा दिया गया, परन्तु  दोनों नई रियासतों में गवर्नर-जनरल के पद को 1950 (भारत के संविधान) और 1956 (पाकिस्तान के संविधान)तक रखा गया.


फोर्ट विलियम प्रेसीडेंसी के गवर्नर (बंगाल), 1774-1833

 नाम                                          गवर्नर (से लेकर)
वॉरेन हेस्टिंग्स    1773-1785
(मुख्य कार्य – Regulating Act of 1773, Supreme Court,Asiatic Society of Bengal, Bhagwat Gita का अंग्रेजी अनुवाद )

लार्ड  कॉर्नवॉलिस  1786-1793
(निचली और उपरी अदालतें,संस्कृत कॉलेज,स्थाई बंदोबस्त बंगाल व बिहार 1793,कार्नवालिस कोड,सिविल सर्विस )

सर जॉन शोर     1793-1798
(चार्टर एक्ट 1793)

सर अलर्ड क्लार्क(कार्यकारी)        1798-1798
रिचर्ड वेलेजली        1798-1805
(चौथा एंग्लो मैसूर युध्ह १७९९ (टीपू सुल्तान शहीद हुए ),फोर्ट विलियम कॉलेज कोलकाता , मद्रास प्रेसीडेंसी का निर्माण 1801 , सहायक संधि )
मार्कस कॉर्नवॉलिस (एक्टिंग)        1805-1805
सर जॉर्ज बारलो, बीटी(कार्यकारी)  (कार्नवालिस के मृत्यु के बाद)    1805-1807
(सिपाही विद्रोह वेल्लोर १८०६ )

द लॉर्ड मिंटो            1807-1813

(चार्टर एक्ट १८१३)

लार्ड हेस्टिंग्स         1813-1823
(तृतीय एंग्लो मराठा वॉर १८१६-१८१८, बम्बई प्रेसीडेंसी १८१८ , रय्यत वारी , महल वारी सिस्टम )
जॉन ऐडम्स(कार्यकारी)        1823-1823

द लॉर्ड एमहर्स्ट            1823-1828


विलियम बटरवर्थ बेले(कार्यकारी)        1828-1828


लार्ड विलियम बेन्टिक        1828-1833

(बंगाल सती प्रथा उन्मूलन १८२९, चार्टर  एक्ट १८२९)


भारत के गवर्नर-जनरल, 1833-1858

 लोर्ड विलियम बेंटिक                1833-मार्च 1835

 सर चार्ल्स मेटकाफ , बीटी(कार्यकारी)         मार्च 1835-    मार्च 1836

 द लॉर्ड ऑकलैंड               मार्च 1836-    फ़रवरी 1842

 द लॉर्ड एलेनबरो             फ़रवरी 1842-1844

 विलियम विल्बरफोर्स बर्ड(कार्यकारी)         1844-जुलाई 1844

 सर हेनरी हार्डिंग[            जुलाई 1844-जनवरी 1848

 द अर्ल ऑफ डलहौजी             जनवरी 1848 -फ़रवरी 1856
(डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स , चार्ल्स वुड्स डिस्पैच,बम्बई से ठाणे के बीच रेलवे लाइन , पोस्ट ऑफिस एक्ट १८५४,पी डब्लू,डी , रूरकी इंजीनियरिंग कॉलेज )
द विस्काउंट कैनिंग              फ़रवरी 1856-नवम्बर 1858
(बम्बई , कलकत्ता, मद्रास यूनिवर्सिटी १८५७ , १८५७ का विद्रोह , भारत सर्कार अधिनियम १८५८, विधवा पुनर्विवाह १८५६)

* उपरोक्त सभी ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा नामित थे

भारत के गवर्नर जनरल और वायसराय, 1858-1947

द विस्काउंट कैनिंग    नवम्बर 1858     मार्च 1862

द अर्ल ऑफ एल्गिन     मार्च 1862         नवम्बर 1863


सर जॉन लॉरेंस, बीटी     जनवरी 1864     जनवरी 1869


द अर्ल ऑफ मेयो     जनवरी 1869     फ़रवरी 1872


सर जॉन स्ट्रेची(कार्यकारी)     फ़रवरी 1872     फ़रवरी 1872


द लॉर्ड नेपियर(कार्यकारी)     फ़रवरी 1872      मई 1872

लॉर्ड नॉर्थब्रुक        मई 1872         अप्रैल 1876

द लॉर्ड लिटन         अप्रैल 1876     जून 1880


मार्कस ऑफ रिपन     जून 1880         दिसम्बर 1884

( फर्स्ट फैक्ट्री एक्ट १८८१, वर्नाकुलर प्रेस एक्ट हटाया १८८२, इल्बेर्ट बिल विवाद )

द अर्ल ऑफ डफरिन     दिसम्बर 1884     दिसम्बर 1888

द मार्कस ऑफ लैंसडाउन     दिसम्बर 1888     अक्टूबर 1894

द अर्ल ऑफ एल्गिन     अक्टूबर 1894     जनवरी 1899


द लॉर्ड कर्जन ऑफ केडलस्टोन    जनवरी 1899     नवम्बर 1905

* उपरोक्त सभी विक्टोरिया द्वारा नामित थे

द अर्ल ऑफ मिंटो     नवम्बर 1905     नवम्बर 1910

* उपरोक्त एडवर्ड 7 Edward VII द्वारा नामित

लॉर्ड हार्डिंग ऑफ पेनशर्ट्स     नवम्बर 1910     अप्रैल 1916


द लॉर्ड चेम्सफोर्ड     अप्रैल 1916     अप्रैल 1921

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