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Tuesday, 22 November 2016

भाग 5 संघ , Part 5 THE UNION

भाग 5 संघ , Part 5 THE UNION

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति
राष्ट्रपति वास्ताव् में संवैधानिक प्रमुख होता है, यह एक शक्ति के पद की तुलना में , सम्मान का पद है | राष्ट्रपति इकलौता ऐसा पद है जो सैन्य के तीनो अंगो का प्रमुख तथा विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका से सम्बध्ध्ह है |भारत में अब तक सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी (64 वर्ष) | राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में 50सदस्यों से अनुमोदन होना चाहिए | 1967 में सर्वाधिक 17 प्रत्याशी थे राष्ट्रपति पद के लिए | राष्ट्रपति चुनाव में जमानत राशी 1500 रूपए है | राष्ट्रपति निर्वाचन से सम्बंधित सभी वाद सर्वोच्च न्यायालय से ही होते है राष्ट्रपति के पद को शपथ ससर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिया जाता है | भारत में एक व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति के पद चुना जा सकता है , इस बारे में कोई उल्लेख संविधान में नहीं है | USA में एक ही व्यक्ति मात्र 2 बार ही राष्ट्रपति के लिए चुना जा सकता है, सिर्फ FD रूसवेल्ट ही USA में ४ बार राष्ट्रपति चुने गए थे| राष्ट्रपति अपना त्याग पात्र उपराष्ट्रपति को सौंपता है, राष्ट्रपति की मृत्यु या इस्तीफे की वजह से रिक्त हुए पद का चुनाव 180 दिनों में हो जाना चाहिए |
वीटो शक्तियाँ
विधायिका की किसी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने की शक्ति वीटॉ शक्ति कहलाती है संविधान राष्ट्रपति को तीन प्रकार के वीटो देता है।
(1) पूर्ण वीटो – निर्धारित प्रकिया से पास बिल जब राष्ट्रपति के पास आये (संविधान संशोधन बिल के अतिरिक्त)] तो वह् अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणा कर सकता है किंतु यदि अनु 368 के अंतर्गत कोई बिल आये तो वह अपनी अस्वीकृति नही दे सकता है
(2) निलम्बनकारी वीटो – संविधान संशोधन अथवा धन बिल के अतिरिक्त राष्ट्रपति को भेजा गया कोई भी बिल वह संसद को पुर्नविचार हेतु वापिस भेज सकता है किंतु संसद यदि इस बिल को वापिस पास कर के भेज दे तो उसके पास सिवाय इसके कोई विकल्प नही है उस बिल को स्वीकृति दे दे। इस वीटो को वह अपने विवेकाधिकार से प्रयोग लेगा। इस वीटो का प्रयोग अभी तक संसद सदस्यॉ के वेतन बिल भत्ते तथा पेंशन नियम संशोधन 1991 मे किया गया था। यह एक वित्तीय बिल था। राष्ट्रपति वेंकट रमण ने इस वीटो का प्रयोग इस आधार पर किया कि यह बिल लोकसभा मे बिना उनकी अनुमति के लाया गया था।
(3) पाकेट वीटो – संविधान राष्ट्रपति को स्वीकृति अस्वीकृति देने के लिये कोई समय सीमा नही देता है यदि राष्ट्रपति किसी बिल पे कोई निर्णय ना दे ([सामान्य विधेयक ) तो इसे पाकेट वीटो का कहलाता है | पेप्सू बिल 1956 तथा भारतीय डाक बिल 1984 मे राष्ट्रपति ने इस वीटो का प्रयोग किया था।
राष्ट्रपति के मात्र दो विवेकाधिकार है1. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना
2. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में लोकसभा को भंग करना

राष्ट्रपति को रबर स्टाम्प नहीं कहा जा सकता क्युकी उसकी स्तिथि मैच रेफ़री या इमरजेंसी लाइट की तरह होती है |
52.भारत का राष्ट्रपति–भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
53.संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
53(2) संघ के रक्षा बलों का सर्वोच्च समादेश राष्ट्रपति में निहित होगा।
54राष्ट्रपति का निर्वाचक मण्डल –राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचकगण के सदस्य करेंगे जिसमें–
(क) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यऔर
(
ख) राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यहोंगे( केवल दिल्ली और पोंडिचेरी के विधान सभा सदस्यों को ही वोट का अधिकार है, संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992) नोट :- राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में 5000 सदस्य है |
55. राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति का उल्लेख |
55(3) राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।| नोट -1971 की जनगणना के अनुसार , या 2026 के पश्चात् के जनगणना को लिया जायेगा |
नोट :- मत मूल्य के बारे में कुछ तथ्य विभिन्न  राज्यों के विधान सभा के सदस्यों का चुनाव विभिन्न मतों से होता है , इसलिए निर्वाचक का मत मूल्य का प्रयोग किया जाता है एक MLA का मत मूल्य= 1971 की जनसँख्या के अनुसार  (राज्य की जनसँख्या/ MLA)*1/1000
किसी सांसद का वोट वैल्यू =
भारत के सभी निओर्वाचित MLA की वोट वैल्यू/सभी निर्वाचित सांसद (543+ 233) = 708

उत्तर प्रदेश की MLA की वोट वैल्यू सर्वाधिक २०८१ तथा न्यूनतम सिक्किम (7), अरुणाचल प्रदेश की 8 है |
56(1) राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा|
56(क) राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा|
58. राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएँ—
(क) भारत का नागरिक है,
(ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, और
(ग) लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।
58(2) सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्ति , राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा( नोट – परन्तु इसमें राज्यपाल या मंत्री शामिल नही है, यानि की लाभ के पद पर न हो , संविधान में लाभ के पद को परिभाषित नहीं किया गया है )
59.राष्ट्रपति के पद के लिए शर्तें – राष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा , राष्ट्रपति अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा, राष्ट्रपति, बिना किराया दिए, अपने शासकीय निवासों के उपयोग का हकदार होगा, भत्तों राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।
60.राष्ट्रपति का शपथ
61.राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया,–>  जो कम से कम चौदह दिन की ऐसी लिखित सूचना के दिए जाने के पश्चात्‌ प्रस्तावित किया गया है जिस पर उस सदन ( महाभियोग चलने की प्रक्रिया किसी भी सदन में प्रस्तुत की जा सकती है )  की कुल सदस्य संख्‍या के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों ने हस्ताक्षर करके उस संकल्प को प्रस्तावित करने ,और  उस सदन की कुल सदस्य संख्‍या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा ऐसा संकल्प पारित  किया गया हो ।
दुसरे  सदन (आरोप का अन्वेषण करने के पश्चात् )  की कुल सदस्य संख्‍या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति हो हटना होता है |
62.राष्ट्रपति की मृत्यु या इस्तीफे की वजह से रिक्त हुए पद का चुनाव १८० दिनों में हो जाना चाहिए |
63.भारत का उपराष्ट्रपति–भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
64. उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना–उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा:परंतु जिस किसी अवधि के दौरान उपराष्ट्रपति, अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है, उस अवधि के दौरान वह राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और वह अनुच्छेद 97 के अधीन राज्य सभा के सभापति को संदेय वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होगा। उपराष्ट्रपति  को वेतन नहीं मिलता है , उसे सिर्फ सभापति , राज्यसभा का वेतन मिलता है |
66(1).उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।
66(2).उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा |
66(3). उपराष्ट्रपति की अहर्ताए-
(क) भारत का नागरिक है
(ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, और
(ग) राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।66(4). कोई लाभ का पद धारण करता है, उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा।
67.उपराष्ट्रपति की पदावधि– उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा: परंतु–
67(क) उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;
(ख) उपराष्ट्रपति, राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया है और जिससे लोकसभा सहमत है; किंतु प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दे दी गई हो|
67.उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
72. राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण कर सकता है , परन्तु सेना अधिकारी को सेना न्यायलय द्वारा दिया गया दंड में यह अनुच्छेद लागु नही होता |
क्षमा – किसी सजा को सम्पूर्ण समाप्त
लघुकरण – सजा की पद्धति बदलकर उसे कम करना
परिहार – सजा की पद्धति बिना बदलकर उसे कम करना
विराम – किसी विशेष परिस्तिथि में सजा को कम या समाप्त करना 
अविलंबन – सजा को रोक देना
मंत्रि-परिषद
74. राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद होगी , राष्ट्रपति किसी विधेयक को सलाह देकर वापस कर सकता है , परन्तु वह यह सिर्फ एक बार कर सकता है |
74क मंत्रि-परिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्‍या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्‍या के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहींहोगी।
भारत का महान्यायवादी
76. राष्ट्रपति , किसी  उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करेगा।
76(2) महान्यायवादी  भारत सरकार को विधि संबंधी ऐसे विषयों पर सलाह देता है |
सरकारी कार्य का संचालन
77. भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से की हुई कही जाएगी।राष्ट्रपति द्वारा ही मंत्रिपद का बटवारा किया जाता है |
78.राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य

साधारण79.संसद का गठन–संघ के लिए एक संसद‌ होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोकसभा होंगे।
80. राज्य सभा की संरचना
81.लोकसभा की संरचना
83. राज्य सभा का विघटन नहीं होगा, किन्तु उसके सदस्यों में से यथासंभव निकटतम एक-तिहाई सदस्य, संसद‌ द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त किए गए उपबंधों के अनुसार, प्रत्येक द्वितीय वर्ष की समाप्ति पर यथाशक्य शीघ्र निवृत्त हो जाएँगे।
83(2) लोकसभा,अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष तक बनी रहेगी परन्तु जब आपात की स्थिति  में एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी उसके पश्चात् उसका विस्तार किसी भी दशा में छह मास की अवधि से अधिक नहीं होगा।
83.कोई व्यक्ति संसद‌ के किसी स्थान को भरने के लिए चुने जाने के लिए अर्हित  , वह भारत का नागरिक है और ,वह राज्य सभा में स्थान के लिए कम से कम तीस वर्ष की आयु का और लोकसभा में स्थान के लिए कम से कम पच्चीस वर्ष की आयु का है|
86. राष्ट्रपति, संसद‌ के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकेगा
86(1)राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण –लोकसभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात्‌ प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में एक साथ समवेत संसद‌ के दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और संसद‌ को उसके आह्वान के कारण बताएगा।
88. प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की किसी संयुक्त बैठक में और संसद‌ की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले,परन्तु मत नहीं दे सकता |
संसद के अधिकारी89.भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होगा।
97.संसद‌ के प्रत्येक सदन का पृथक् सचिवीय कर्मचारिवृंद होगा;
कार्य संचालनसंसद‌ और उसके सदस्यों की शक्तियाँविशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ105(2). संसद‌ के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों को  संसद‌ में वाक्‌‌-स्वातंत्र्य होगा, उसके विरूद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी संविधान (चवालीसवाँ संशोधन)108(1). संयुक्त बैठक , यदि किसी विधेयक के एक सदन द्वारा पारित किए जाने और दूसरे सदन को पारेषित किए जाने के पश्चात्‌, दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकर कर दिया गया है, या दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हो गए हैं, या  विधेयक पारित किए बिना छह मास से अधिक बीत गए हैं ( धन विधेयक को छोडकर )110. ”धन विधेयक” की परिभाषा कोई विधेयक धन विधेयक समझा जाएगा यदि उसमें केवल निम्नलिखित ,किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने का या कोई प्रत्याभूति देने का विनियमन , भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा |
वित्तीय विषयों के संबंध में प्रक्रिया
112. वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट)
112(3)
 भारत की संचित निधि पर भारित व्यय (क) राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और भत्ते तथा ,राज्यसभा के सभापति और उपसभापति के तथा लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते,ऐसे ऋण भार, जिनका दायित्व भारत सरकार पर है|
115.अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान ,अतिरिक्त व्यय की चालू वित्तीय वर्ष के दौरान आवश्यकता पैदा हो गई है|
123.संसद‌ के विश्रांतिकाल में अध्‍यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति, छह सप्ताह की समाप्ति पर या यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले दोनों सदन उसके अननुमोदन का संकल्प पारित कर देते हैं तो, इनमें से दूसरे संकल्प के पारित होने पर प्रवर्तन में नहीं रहेगा|
124.उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन– भारत का एक उच्चतम न्यायालय होगा जो भारत के मुख्‍य न्यायमूर्ति ,सात से अधिक अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा।
125. न्यायाधीशों के वेतन आदि |126.कार्यकारी मुख्‍य न्यायमूर्ति की नियुक्ति
127. तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति
129.उच्चतम न्यायालय अभिलेख  न्यायालय होगा और उसको अपने अवमान के लिए दंड देने की शक्ति सहित ऐसे न्यायालय की सभी शक्तियाँ होंगी।
133.उच्च न्यायालयों से सिविल विषयों से संबंधित अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता
137.
संसद‌ विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को अनुच्छेद 32 के खंड (2) में वर्णित प्रयोजनों से भिन्न किन्हीं प्रयोजनों के लिए ऐसे निदेश, आदेश या रिट, जिनके अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध,  अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिट हैं, या उनमें से कोई निकालने की शक्ति प्रदान कर सकेगी।
143.यदि किसी समय राष्ट्रपति को प्रतीत होता है कि विधि या तनय का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है,  जो ऐसी प्रकृति का और ऐसे व्यापक महत्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तो वह उस प्रश्न को विचार करने के लिए उस न्यायालय को निर्देशित कर सकेगा और वह न्यायालय, ऐसी सुनवाई के पश्चात्‌ जो वह ठीक समझता है, राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय प्रतिवेदित कर सकेगा।
146.उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियाँ भारत का मुख्‍य न्यायमूर्ति करेगा या उस न्यायालय का ऐसा अन्य न्यायाधीश या अधिकारी करेगा जिसे वह निर्दिष्ट करे|
151.संपरीक्षा प्रतिवेदन– (1) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के संघ के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको संसद‌ के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।
(2) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के किसी राज्य के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को उस राज्य के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा।

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